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बहुत लिखना है पर क्या करू ?

पहली पोस्ट लिखना उतना ही कठिन हे जितना की पहला प्रेम पत्र ,जगजीत सिंह की ये गजल"प्यार का पहला ख़त लिखने में वक्त तो लगता हैं " जब सुनी थी तो समझ नहीं आया की इतना वक्त क्यूँ लगता हैं ,आज समझ आ रहा हैं की वक्त क्यूँ लगता हैं :) हालाँकि इस से पहले तकनिकी विषयों पर काफी सालों से लिख रहा हूँ पर उसमें कोई जोर नहीं पड़ता ,वो भाव विहीन लेखन होता हैं ।

इन्टरनेट के आने से एक बात तो अच्छी हो गई हैं ,आप को लेखक बनने से कोई नहीं रोक सकता ,इतने अच्छे अवसर को हाथ से गंवाना उचित नहीं समझा इसलिए झट से ये ब्लोग बना डाला ।

परन्तु लिखना इतना आसान कन्हा होता हैं ,मन की सोच को शब्दों में ढालना मुझे तो बहुत कठिन लगता हैं ,फिर भी हिम्मत करके शुरुआत तो कर डाली हैं ।

मित्रों आपसे अनुरोध हैं की हिंदी से सम्बन्धित त्रुटियों के लिए मेरी आलोचना मत करियेगा क्यूँ की मेने हिंदी के क्षेत्र में कोई विशेष डिग्री नहीं ले रखी हैं  ,जेसी बोलता हूँ वेसी ही लिख रहा हूँ ।

पहली पोस्ट लिखना उतना ही कठिन हे जितना की पहला प्रेम पत्र ,जगजीत सिंह की ये गजल"प्यार का पहला ख़त लिखने में वक्त तो लगता हैं " जब सुनी थी तो समझ नहीं आया की इतना वक्त क्यूँ लगता हैं ,आज समझ आ रहा हैं की वक्त क्यूँ लगता हैं :) हालाँकि इस से पहले तकनिकी विषयों पर  काफी सालों से लिख रहा हूँ पर उसमें  कोई जोर नहीं पड़ता ,वो भाव विहीन लेखन होता हैं ।
शायद मैं पहले भी लिखना शुरू कर सकता था ,पर तब एक भय था की इतने बड़े बड़े लेखकों के बीच लिखते समय कोई गलती हुई तो बहुत आलोचना होगी ,पर अब उस बात का डर नहीं  "बदनाम  हुवे तो क्या नाम तो हुवा " तो शुरुआत तो हो गई आगे आगे देखो होता हैं क्या .............................दिलीप कुमार सोनी
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शुरुआत ही मुश्किल होता है शुरुआत कर दिए है तो आगे रास्ता बनता जायेगा लिखने लगेगे तो शब्द भी मिलने लगेंगे

अगर सब कुछ सच लिख दिए तो दुनिया जो हमको शरीफ समझे बैठी हैं ,उनका दिल टूट जाएगा और हम ये भी तो नहीं चाहते :)

शाबाश दिलीप भाई !
हिम्मत की है तो फल अवश्य मिलेगा !
फ्री इन्टरनेट से लेखक बनना आसान है मगर सही लेखन दे पाना आसान नहीं !
एक अनुरोध है कभी लोगों को प्रभावित करने की कोशिश न करें केवल इमानदारी से लिखें लोग अपने आप प्रभवित होंगे !
शुभकामनायें आपको !

सतीश जी आप गीतकार हैं,अच्छा लिखते हैं ,इमानदारी से लिखने की कोशिश जरुर करूँगा ,आपकी हौसला अफजाई के लिए शुक्रिया .

हटा दिया भूल वश रह गया था .सूचित करने के लिए धन्यवाद .

आगे आगे देखो होता हैं क्या

pabla जी डरा क्यूँ रहे हो :)

अरे! डरा नहीं रहा
रोमांच की बात कर रहा

अच्छी शुरुआत है,शुभकामनाएँ आपके साथ है.

कृपया अपनी राय दे ,आपके सुझाव हमारे लिए महत्वपूर्ण हैं |

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