मैंने नहीं किया !!!!!

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मैंने नहीं किया-

राहुल सातवीं कक्षा में पढ़ता था। उसकी बस एक ही गंदी आदत थी कि वह बहुत शरारती था। जब उसकी शरारत पकड़ी जाती तो वह झट से कह देता, मैंने नहीं किया। उसकी इस आदत से घरवाले और टीचर्स ही नहीं, बल्कि उसके दोस्त भी परेशान थे।














ब्लैकबोर्ड पर चश्मा लगाए बंदर का चित्र देखकर मास्टरजी का गुस्सा सातवें आसमान पर चढ़ गया। उन्होंने हवा में छड़ी लहराते हुए गुस्से से पूछा, ‘यह किसकी शरारत है? जल्दी बताओ।’ पूरी क्लास में सन्नाटा छा गया। कोई भी मुंह खोलने को तैयार नहीं था। मास्टरजी ने दोबारा पूछा और कहा, ‘अगर अब भी वह छात्र सामने नहीं आया, जिसने यह शरारत की है तो मैं उसे कड़ी-से-कड़ी सजा दूंगा।’
उन्होंने राहुल की ओर देखते हुए पूछा, ‘क्या तुम्हें मालूम है, यह किसकी..’ मास्टरजी अपनी बात पूरी करते कि इससे पहले ही राहुल ने अपना तकिया कलाम दोहरा दिया, ‘मैंने नहीं किया मास्टरजी।’ वह मन ही मन मुस्करा रहा था कि मास्टरजी उसे नहीं पकड़ पाएंगे, क्योंकि क्लास के किसी भी छात्र में उसका नाम बताने की हिम्मत नहीं है। लेकिन मास्टरजी ने भी तय कर लिया था कि जिस छात्र ने भी यह शरारत की है, उसे सबक सिखाकर ही छोड़ेंगे। उन्होंने सब छात्रों से कहा कि वे अपनी-अपनी जगह खड़े हो जाएं। सारे छात्र उनका कहना मानते हुए खड़े हो गए। मास्टरजी एक तरफ से सबके नाखून चेक करने लगे। उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि मास्टरजी ऐसा क्यों कर रहे हैं। तभी मास्टरजी राहुल के पास आकर रुक गए और उससे भी नाखून दिखाने को कहा। उसने लापरवाही से अपने हाथ मास्टरजी की ओर बढ़ा दिए।
उसके हाथ देखते ही मास्टरजी ने उसका कान पकड़ा और खींचते हुए सीट से बाहर निकाला। राहुल दर्द से तिलमिलाने लगा। उसे समझ नहीं आ रहा था कि आखिर मास्टरजी को कैसे पता लगा कि उसने यह चित्र बनाया है। ‘क्यों तुम क्या सोच रहे हो?’ मास्टरजी ने उसकी परेशानी को समझते हुए कहा। ‘यही न कि मुझे कैसे पता चला कि यह चित्र तुमने बनाया है।’ मास्टरजी ने छात्रों की ओर देखते हुए कहा, ‘इसमें बड़ी सीधी बात है कि मैं जानता था कि जिसने भी यह चित्र बनाया है, उसने मुझे आता देख अपने हाथ तो साफ कर लिए होंगे, लेकिन वह यह नहीं जानता है कि चॉक का कुछ पाउडर उसके नाखूनों में जरूर रह जाएगा।
बस, यही बात ध्यान में रखकर मैंने तुम सबसे अपने हाथ दिखाने को कहा। और, जब राहुल का नंबर आया तो मुझे इसके नाखूनों में चाक का पाउडर लगा नजर आ गया, जिस पर इसका ध्यान नहीं गया था। बस, इसी से यह पकड़ा गया।’
मास्टरजी ने पूरे पीरियड के लिए उसे क्लासरूम के बाहर मुर्गा बनने की सजा सुना दी। क्लास के साथियों को मुस्कराते हुए देखकर उसे बहुत बुरा लग रहा था, पर अब क्या हो सकता था।
राहुल सातवीं कक्षा में पढ़ता था। उसकी बस एक ही गंदी आदत थी कि वह बहुत शरारती था। जब उसकी शरारत पकड़ी जाती तो वह झट से कह देता, मैंने नहीं किया। उसकी इस आदत से घरवाले और टीचर्स ही नहीं, बल्कि उसके दोस्त भी परेशान थे। अभी कुछ दिन पहले की बात है कि उसने अपने दोस्त बंटी के बैग से उसकी गणित की कॉपी निकाल कर छिपा दी। जब गणित के पीरियड में मास्टरजी ने बंटी से कॉपी दिखाने को कहा तो उसे बैग में अपनी कॉपी नहीं मिली, इसकी वजह से उसे मास्टरजी से काफी डांट खानी पड़ी। बाद में जब बंटी को राहुल की इस शरारत के बारे में पता चला तो उसने अपना वही रटा-रटाया वाक्य दोहरा दिया कि मैंने नहीं किया। बंटी को उसका जवाब सुनकर बहुत गुस्सा आया। उसने सोच लिया था कि वह राहुल को सबक जरूर सिखाएगा। उसने मोहित और सुबीर से बात की। दोनों ने उसका साथ देने का वादा किया। उस दिन से बंटी और उसके दोस्त मौके की तलाश में रहने लगे कि कब वह कोई शरारत करे और उसे मजा चखाया जाए। राहुल को भी इस बात की खबर लग गई थी कि बंटी उसे मजा चखाने की तैयारी कर रहा है। वह सावधान हो गया।
एक दिन बंटी और उसके दोस्त मार्केट जा रहे थे। रास्ते में उन्होंने देखा कि एक बुजुर्ग आदमी के पीछे कुत्ता भौंक रहा था। वे उसे बार-बार भगा रहे थे लेकिन वह पलट कर फिर आ जाता। उसके इस तरह भौंकने से वे काफी घबरा गए थे। तभी उन्होंने देखा कि अचानक कहीं से राहुल वहां आ गया और उसने कुत्ते को भगा दिया। यही नहीं, उसने बुजुर्ग व्यक्ति का हाथ पकड़ कर उन्हें सड़क भी पार करवाई। यह देख तीनों हैरान थे कि राहुल भी किसी की मदद कर सकता है। लेकिन यही सच था। तीनों ने आपस में कुछ बात की और मुस्करा दिए। अगले दिन वे रोज की तरह स्कूल गए। पहला पीरियड गणित का था, जिसमें कि एक बार बंटी को राहुल की वजह से डांट भी खानी पड़ी थी। बंटी राहुल की ओर देखकर मुस्कराया। इधर मास्टरजी क्लास में आ गए। बंटी सीट से खड़ा हुआ और उसने मास्टरजी से कहा, ‘सर, मुझे आपसे राहुल के बारे में कुछ कहना है। कल राहुल ने..’ बंटी अपनी बात पूरी भी नहीं कर पाया था कि राहुल बीच में बोल पड़ा, ‘सर, बंटी झूठ बोल रहा है। मैंने कुछ नहीं किया।’ मास्टरजी ने उसे चुप करवाते हुए बंटी को पूरी बात बताने को कहा। बंटी ने कहा, ‘सर, कल मार्केट में एक बुजुर्ग व्यक्ति के पीछे कुत्ता भौंक रहा था, जिससे वे परेशान थे। राहुल ने उनकी मदद की। सच में कल राहुल ने अच्छा काम किया है।’ ‘लेकिन अभी तो राहुल ने कहा है कि तुम झूठ बोल रहे हो। लगता है तुम राहुल की झूठी तारीफ कर रहे हो। मुझे तुम्हारी नहीं, राहुल की बात सही लग रही है।’ यह कहकर मास्टरजी ने मुस्कराते हुए राहुल की ओर देखा। राहुल आंखें नीचे किए खड़ा था। आज उसे पहली बार इस आदत पर अफसोस हो रहा था। उसने तय किया कि वह इस आदत को छोड़ देगा।
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