Hindi Story, Hindi Poem, Hindi Kavita, Hindi Kahani, Hindi Article

पुदीने के चावल - कहानी


कहानी का नाम है  "पुदीने के चावल"


राजा प्रताप सिंह अपने महल से निकले शिकार करने के लिए रथ मे बैठ कर. रानी चन्द्र देवी ने उनके पीछे पीछे एक और रथ में तरह तरहके स्वादिष्ट पकवान जेसे बेसन के लड्डू, बंदी के लड्डू, मेवा के लड्डू, आम पापड़ की बर्फी, बादाम की बर्फी, काजू का हलवा, फलो कीखीर, देसी घी और दूध से बनी पुरिया और मीठे मीठे आम आदि रखवा दिए और साथ ही एक बड़े से मटके में ठंडा ठंडा पानी भी रखवा दिया.और उन्हें लगा की ये सब भी कम हे तो तीन चार चांदी की सुराहियो में ठंडे, खस का शरबत, बादाम का शरबत भी रखवा दिया.
राजा प्रताप सिंह के साथ उनके ४०-५० दरबारी भी गये साथ में. शिकार खेलते खेलते वो लोग दूर एक बहुत सुन्दर नदी के किनारे पे पहुँच गए.अब सबने मिलकर नदी मे नहाना शुरू कर दिया. इधर तो राजा जी नहा रहे थे दरबारियों के साथ नदी के ठन्डे ठन्डे पानी में और वहीं एक बड़ा सा बंदरो का झुण्ड खाने का सामान रखे हुये बडे से रथ पर कूद गया. बस फिर तो बंदरो की मौज आ गयी. क्या खान था क्या शरबत था सब का सब उन्होंने खाया और खूब फेलाया.और वहां से चले गये.
राजा और उनके दरबारी जब बाहर निकले और ये तमाशा देखा तो दंग रह गये. राज़ा खूब हँसे और ताली बजा के हंसने लगे. परन्तु जो लालची दरबारी थे उन्हें बहुत गुस्सा आया की इतना बढ़िया खाना बन्दर खा गये.
राजा ने अपने दो तीन दरबारियों को आस पास के गाँव से खाने का बंदोबस्त करने को कहा.दरबारी बेचारे आस पास किसी गाँव को ढूँढने चले गये और राजा अपने साथ लाये तम्बू मे आराम करने लगे और दरबारी बैठ के चौपद खेलने लगे.
वो तीनो दरबारी पास के एक गाँव में जा पहुंचे और वहांके मुखिया को बताया की राज़ा यही पास में विश्राम कर रहे हैं और खाना खाने की लिए कुछ चाहिए.मुखिया को बड़ी ख़ुशी हुयी. वो एक बुजुर्ग आदमी थे और अनुभवी भी. उन्होंने अपने घर से एक खूब बड़ा मटका देसी घी का निकलवाया और आँगन में अंगीठी जलवाई. एक बहुत बड़े बर्तन में देसी घी डलवाया और उसमें चावल और नमक डलवाया और फिर पानी भी मिलवा दिया. एक आदमी को खेत पे भेज कर पुदीना मंगवाया और उसे पिसवा के चावलों में मिलवा दिया....थोड़ी देर में चावल पाक कर तैयार हो गयेतो मुखिया ने खूब साड़ी नमकीन और मीठी लस्सी तैयार करवायी और दरबारियों के साथ राजा से मिलने चल दिये.
राजा और दरबारियों ने जब पुदीने के चावल खायी और लस्सी पी तो वाह वाह कर उठे और राज़ा ने अपने गले की माला उतार कर मुखिया को दे दी.उन्होंने मुखिया से पुछा की चावल इतने खुशबू दार केसे बने तो मुखिया ने उन्हें बताया की चावल में पुदीना मिला हे.राज़ा हंस के बोले तो ठीक हे अब हम जब इस तरफ शिकार के लिये आएंगे तो पुदीना के चावल ही खाया करेंगे.मुखिया बहुतखुश हुये और राजा की जय जैकार करते हुये अपने गाँव लौट गये.
तो जरुरी नहीं की महंगी चीज़ ही अच्छी हो कभी कभी घर की बनी साद्दी चीजों में भी खूब मजा आता हे...हे ना ......?
Labels:
Reactions:

Post a Comment

कृपया अपनी राय दे ,आपके सुझाव हमारे लिए महत्वपूर्ण हैं |

loading...
[facebook][blogger]

MKRdezign

Contact Form

Name

Email *

Message *

Powered by Blogger.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget