सच्चा व्रत करने वाले होटलों में मिलने वाली व्रत की थाली न खाए

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होटलों में मिलने वाली व्रत की थाली -



नवरात्र मे नौ दिन का व्रत प्राय: सभी लोग रखते हैं। कुछ लोग की तबियत खराब होने लगती है। dehydration, बदहज़मी, सर दर्द आदि की समस्या होने लगती है | अब आप ही भला सोचिये, अस्वस्थ मन से आपकी पूजा कैसे बिना किसी बाधा के पूर्ण होगी | व्रत में कमजोरी या अन्य परेशानियोंसे बचने के लिए हल्का फुल्का कुछ न कुछ जरुर खाते रहें |अगर खा नहीं सकते , तो पेय पदार्थ जैसे ताजा फलो का जूस, दूध , छाछ अवश्य लें | इससे dehydration नहीं होगा | सादे पानी की जगह बीच बीच मे नीबू पानी या नालियल पानी भी पी सकते हैं। इससे शारीर को भरपूर एनर्जी मिलती है। व्रत के दौरान अपने आहार मे फाइबर युक्त फल व सब्जियों को शामिल करें।
आज कल होटलों में ऐसी व्रत की थाली देने का रिवाज चल पडा है। शकरकंदी की चाट, आलू रसेदार, कच्चे केले के कोफ्ते, व्रत के चावल, खीरे का रायता, कुट्टू की पूड़ी, कुट्टू के पकौड़े, साबूदाने की टिक्की, व्रत के पापड़, मखाने की खीर। इसके अलावा पनीर मखानी, पालक पनीर, पालक आलू, भिंडी मसाला, जीरा आलू, सीताफल की सब्जी, मुम्फली की दाल तड़के वाली दही वाले आलू, खीरा-टमाटर रायता, ड्राई फ्रूट ।

जो लोग व्रत नहीं करते वे भी ऐसी लज़ीज़ व्रत की थाली का आनंद ज़रूर लेते है। बिना व्रत के ऐसी थाली का आनंद लेना तो ठीक है।

पर यदि सच्चा व्रत करना हो तो ध्यान रहे होटल की ये सात्त्विक कही जानेवाली थाली के भोजन को बनाते समय मन एवं शरीर के स्तर पर शुचिता का पालन नहीं किया जाता है| इसके साथ ही अन्य भोजन भी पकता रहता है. होटल में खाते समय हारा ध्यान अन्य भोजन और लोगों पर होता है नाकि आध्यात्मिक . अतः यह तमोगुणी ही होता है इसे विपरीत आप घर पर ही फल काटकर और दूध या दही का सेवन कर सकते हैं वह अधिक लाभकारी होगा ! फलाहार या सात्विक आहर का मुख्य उद्देश्य होता है अपने इंद्रियों को नियंत्रित कर अल्प प्रमाण में सात्विक भोजन लेना और इस कारण ईश्वर का स्मरण रहता है . उपवास का अर्थ ही है उप अर्थात निकट और वास अर्थात उपस्थित रहना जब ईश्वर के निकट रहते हैं उसे उपवास कहते हैं , भर पेट स्वादिष्ट फलाहार को ग्रहण करने को उपवास नहीं कहते।

नवरात्र मे नौ दिन का व्रत प्राय: सभी लोग रखते हैं| अगर आप व्रत के दौरान अपना वजन नहीं बढाना चाहते है, तो दिन मे आलू या आलू के चिप्स खाने के बजाय ताजे फल सब्जियों की सलाद खाएं | दूध से बनी खाद सामग्री, कुट्टू या सिंघाड़े के आटे की रोटी और घीया की सब्जी अपने भोजन मे शामिल कर सकते हैं। इसका नियमित सेवन शारीर मे पोषक तत्वों की कमी को पूरा करेगा | सलाद मे खीरा, टमाटर, मूली आदि ले सकते हैं| दही का प्रोटीन गुणकारी होता है। इससे ६० कैलोरी उर्जा मिलती है।  इसलिए व्रत मे थोडा सा दही खाने से भी पेट भरा लगता है। दही खाने से प्यास भी अधिक नहीं लगती | शाम को व्रत खोते समय एकदम से तला भुना खाने की जगह पहले कुछ फल या दही की लस्सी पिए। इससे आपका हाजमा भी अच्छा रहेगा।

खाने मे सेंधा नमक का इस्तमाल जरूर करें, नहीं तो नमक की कमी के कारण आप परेशानी मे पड़ सकते हैं | जूस या नारियल पानी और पानी प्रयाप्त मात्रा मे पियें। उपवास के नाम पर लोग साबूदाना , आलू, सिंघाड़े और कुट्टू के आटे का प्रोयोग करते हैं। ये सारी चीज़े गरिष्ट होती हैं | ऐसे मे इनको यदि घी के साथ तैयार करते हैं,
तो ये और भी गरिष्ट हो जाता है। पानी मात्रा मे जादा पीना चाहिए ताकि शारीर मे उत्पन्न होने वाले टोक्सिन , पेशाब एवं पसीने के रूप में हमारे शारीर से बाहर निकल सकें | कुट्टू के आटे की पूरियां बनाने की जगह कुट्टू के आटे की रोटी सेकें | सीताफल (कददू) की सब्जी व सावा के चावल की खिचड़ी दही के साथ खा सकते हैं।


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