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"अहिंसा परमो धर्मः" "पूर्ण श्लोक क्यों नही बतायालोगो को ??"

"अहिंसा परमो धर्मः" . "पूर्ण श्लोक क्यों नही बतायालोगो को ??" . ""अहिंसा परमो धर्मः धर्म हिंसा तथैव च: l" . (अर्थात् यदि अहिंसा परम् धर्म है, तो धर्म के लिए हिंसा अर्थात्..{कानून के अनुसार हिंसा}




जब खुद में लड़ने का दम नही था तो गीता के श्लोक को आधा करके
लोगो को नपुंसक बना दिया ।

"अहिंसा परमो धर्मः"
"पूर्ण श्लोक क्यों नही बतायालोगो को ??".
""अहिंसा परमो धर्मः धर्म हिंसा तथैव च: l".
(अर्थात् यदि अहिंसा परम् धर्म है, तो धर्म के लिए हिंसा अर्थात्..{कानून के अनुसार हिंसा}
भी परम् धर्म है । अहिंसा मनुष्य का परम धर्म
है, और धर्म की रक्षा के लिए हिंसा करना उस
से भी श्रेष्ठ है..!!।
जब जब धर्म(सत्य) पर संकट आये तब तब तुम शस्त्र उठाना --
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अहिंसा परमो धर्मः, अहिंसा परमो तपः।
अहिंसा परमो सत्यं यतो धर्मः प्रवर्तते।
अहिंसा परमो धर्मः, अहिंसा परमो दमः
अहिंसा परम दानं, अहिंसा परम तपः
अहिंसा परम यज्ञः अहिंसा परमो फलम्‌।
अहिंसा परमं मित्रः अहिंसा परमं सुखम्‌॥
महाभारत / अनुशासन पर्व (११५-२३/ ११६-२८-२९)
कृपया भ्रम न फैलाया जाए।

श्लोक का सम्पूर्ण संदर्भ क्या है? गीता का तो नहीं लगता।

जानकारी के लिए धन्यवाद् ............

कृपया अपनी राय दे ,आपके सुझाव हमारे लिए महत्वपूर्ण हैं |

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