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जब गणेश जी हंस पड़े

एक दिन नदी किनारे के मंदिर पर नजर पड़ी बहु ने अंदर जा कर देखा,गणेश जी का मंदिर था ,,मोदक प्रिय गणेश जी को गुड का भोग लगा था | भक्तो ने घी के दीपक जलाये थे | जो हवा से बुझ गये थे |उनमे काफी घी बचा था |ये सब देख बहु की बांचे खिल गई,वो दौड़ कर बाटीया लाइ और गणेश जी सूंड में


"जब गणेश जी हंस पड़े "
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एक साहूकार के बेटे की छोटी बहु अपने माँ बाप की इकलोती लाडली संतान थी | खाने पीने की शौकीन थी |
मगर साहूकार की पत्नी कंजूस थी वो बहु को खाने पीने को नपा तुला देती और काम ढेर सारा करवाती | बहु असंतुस्ट रहती, जैसा  की आमतोर पर होता है | साहूकारनी दो रुखी बाटी बना कर बहु को देती और नदी किनारे कपडे धोने भेज देती |बहु मन मसोस कर रह जाती |एक दिन नदी किनारे के मंदिर पर नजर पड़ी बहु ने अंदर जा कर देखा,गणेश जी का मंदिर था ,,मोदक प्रिय गणेश जी को गुड का भोग लगा था |
भक्तो ने घी के दीपक जलाये थे | जो हवा से बुझ गये थे |उनमे काफी घी बचा था |ये सब देख बहु की बांचे खिल गई,वो दौड़  कर बाटीया लाइ और गणेश जी सूंड में गुड़ लिया , बातीयो को चूरा औरऔर वही रखे घी गुड मिला कर चूरमा बना कर खाया |और अब तो ये रोज का नियम हो गया |बहु बहुत  खुश रहने लगी |मगेर गणेश जी हैरान की ये ठीक हे लोग तो चढाते हे और ये गटक जाती हे अचरज से गणेश जी मुह पर अन्गली रख सोचने लगे | जब दुसरे भक्तो ने देखा की गणेश जी की अंगुली मुह के पास यह कैसे  , किसी को समझ नही आया | राजा को सुचना दी ,राजा ने भी देखा और अचरज में पड़ गया ,पंडितो से राय ली| पंडितो की मन्तेर पूजा सब व्येर्थ ,राजा परेशान की कोई संकट राज्य पर न आने वाला हो |
उसने मुनादी कराई, की जो कोई गणेश जी की अंगुली निकलवा देगा उसे भरपूर इनाम दिया जायेगा |

सभी ने मुनादी सुनी अपने अपने तरीके से पर्यास किया पूजा अर्चना की सब व्येर्थ | धीरे धीरे बात साहूकार के गाँव तक पहुंची | 
बहु ने भी सुनी,वो तो सब जानती थी |उसने सास को कहा ये तो बड़ी बात नही में कर दूंगी ,सास ने डपट कर चुप करने की कोशिश की पर उसने जिद की तो सास बोली इनाम के लालच में कह रही हे राजा सनकी होते हे यदि नही हुवा तो जान भी ले लेगा पर बहु ने जिद की उसने ससुर जी से बात की ,बहु ने ससुर जी को कहलवाया की आप राजा जी से कहदे की अपने घर  से मंदिर तक कनाते लगवादे | मैं  अकेली जाउंगी | सासु जी डरी हुई तो थी पर बहु की जिद देख सब करवाया | सब इंतजाम हो गया, ,
तब बहु ने एक बड़ा सा पत्थर  लिया और दौडी दौडी  गणेश जी के मंदिर पहुंची लगी गणेश जी को डांटने , कि बाटी तो मैं  अपने घर से लाती थी क्या हो गया जो तेरे घी गुड से सुंडी में चूरमा बना लिया तो | मैं  नही तो कोई और जानवर खाते .. निकाल अंगुली नही तो दूंगी एक पत्थर  की  |अब तो गणेश जी और भी हैरान की ये ठीक है  अब मारेगी भी और आश्चर्य से बहु को देख कर हंस पड़े |गणेश जी हंसने लगे तो अंगुली मुह पर से हट गई |बहु ने देखा और बोली की हा अब ठीक हे ,खबरदार कोई नाटक किया तो एक पड़ेगी |घर  जाकर सासु माँ को कहा राजा जी से कहो देख ले , सबने देखा ,राजा ने भी ,और वचनानुसार इनाम भी दिया |चारो और बहु की जय जय कार.................सास ने भी बहु को मान दिया और खातिर करने लगी |

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