Hindi Story, Hindi Poem, Hindi Kavita, Hindi Kahani, Hindi Article

कद्दू है बहुत गुणकारी ..

पके फल मधुर, स्निग्ध, शीतल, त्रिदोषहर (विशेषतः पित्तशामक), बुद्धि को मेधावी बनाने वाले, हृदय के लिए हितकर, बलवर्धक, शुक्रवर्धक व विषनाशक हैं। जहां यह हृदयरोगियों के लिए बहुत लाभदायक होती है, वहीं कोलेस्ट्रॉल को कम करने में भी सहायक होती है कुम्हड़ा मस्तिष्क को बल व शांति प्रदान करता है।

कुम्हड़ा या कददू प्रकृति ने अपनी इस 'बड़ी' देन में कई तरह के औषधीय गुण समेटे हैं। इसका सेवन स्वास्थ्यवर्धक माना जाता है। इस सब्जी में 'पेट' से लेकर 'दिल' तक की कई बीमारियों के इलाज की क्षमता है।
शीत ऋतु में कुम्हड़े के फल परिपक्व हो जाते हैं। पके फल मधुर, स्निग्ध, शीतल, त्रिदोषहर (विशेषतः पित्तशामक), बुद्धि को 
मेधावी बनाने वाले, हृदय के लिए हितकर, बलवर्धक, शुक्रवर्धक व विषनाशक हैं। जहां यह हृदयरोगियों के लिए बहुत लाभदायक होती है, वहीं कोलेस्ट्रॉल को कम करने में भी सहायक होती है
कुम्हड़ा मस्तिष्क को बल व शांति प्रदान करता है। यह निद्राजनक है। अतः अनेक मनोविकार जैसेउन्माद(Schizophrenia), 
मिर्गी(Epilepsy), स्मृति-ह्रास, अनिद्रा, क्रोध, विभ्रम, उद्वेग, मानसिक अवसाद (Depression), असंतुलन तथा मस्तिष्क 
की दुर्बलता में अत्यन्त लाभदायी है। यह धारणाशक्ति को बढ़ाकर बुद्धि को स्थिर करता है। इससे ज्ञान-धारण (ज्ञान-संचय) करने की बुद्धि की क्षमता बढ़ती है। चंचलता, चिड़चिड़ापन, अनिद्रा आदि दूर होकर मन  शांत हो जाता है।
कुम्हड़ा कद्दू का रस भी सेहत के लिए बहुत फायदेमंद होता है।रक्तवाहिनियों व हृदय की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है। रक्त का प्रसादन (उत्तम रक्त का निर्माण) करता है। वायु व मल का निस्सारण कर कब्ज को दूर करता है। पीले और संतरी कद्दू में केरोटीन की मात्रा अपेक्षाकृत ज्यादा होती है। बीटा केरोटीन एंटीऑक्सीडेंट होता है जो शरीर में फ्री रैडिकल से निपटने में मदद करता है। कद्दू ठंडक पहुंचाने वाला होता है। शीतल (कफप्रधान) व रक्तस्तम्भक गुणों से नाक, योनि, गुदा, मूत्र आदि द्वारा होने वाले रक्तस्राव को रोकने में मदद करता है। 
पित्तप्रधान रोग जैसे आंतरिक जलन, अत्यधिक प्यास, अम्लपित्त (एसिडिटी), बवासीर, पुराना बुखार आदि में कुम्हड़े का रस, सब्जी, अवलेह (कुष्मांडवलेह) उपयोगी हैं।
अंग्रजी दवाइयों तथा रासायनिक खाद द्वारा उगायी गयी सब्जियाँ, फल और अनाज के सेवन से शरीर में विषैले पदार्थों का संचय होने लगता है, जो कैंसर के फैलाव का मुख्य कारण है। कुम्हड़े और गाय के दूध, दही इत्यादि में ऐसे विषों को नष्ट करने की शक्ति निहित है।
कद्दू के बीज भी बहुत गुणकारी होते हैं। कद्दू व इसके बीज विटामिन सी और ई, आयरन, कैलशियम मैग्नीशियम, फॉसफोरस, पोटैशियम, जिंक, प्रोटीन और फाइबर आदि के भी अच्छे स्रोत होते हैं। यह बलवर्धक, रक्त एवं पेट साफ करता है, पित्त व वायु विकार दूर करता है और मस्तिष्क के लिए भी बहुत फायदेमंद होता है। क्षयरोग (टी.बी.) में कुम्हड़े के सेवन से फेफड़ों के घाव भर जाते हैं तथा खाँसी के साथ रक्त निकलना बंद हो जाता है। बुखार व जलन शांत हो जाती है, बल बढ़ता है। 
सर्दियों में बलदायी कुम्हड़े के बीजों के लड्डू
लाभः इसके वजन, शक्ति, रक्त और शुक्रधातु की वृद्धि होती है, बुद्धि भी बढ़ती है।
विधिः कुम्हड़े के बीजों के अंदर की गिरी निकालकर उसे थोड़ा गर्म करके बारीक पीस लें। लोहे के तवे पर घी में लाल होने तक भूनें। मिश्री की चाशनी में मिलाकर तिल के लड्डू क समान छोटे-छोटे लड्डू बनायें। सर्दियों में बच्चे 1 और बड़े 2-3 लड्डू चबा-चबाकर खायें।
Reactions:

Post a Comment

अति ज्ञान वर्धक ,अन्यथा कद्दू को तो मैं दसवा के दिन ही खाने की सब्जी मानता हु। धन्यवाद पूर्णिमाजी इस पोस्ट के लिए

जी हा ये मैंने भी देखा है की महिलाओ की अपेक्षा पुरुषों में कम ही पसंद आता है ..इसी लिए इसे पोस्ट लिया है
आपने इसे समझा आपका धन्यवाद |

बहुत सुन्दर प्रस्तुति..
आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आप की इस प्रविष्टि की चर्चा शनिवार 12/10/2013 को त्यौहार और खुशियों पर सभी का हक़ है.. ( हिंदी ब्लॉगर्स चौपाल : 023)
- पर लिंक की गयी है , ताकि अधिक से अधिक लोग आपकी रचना पढ़ सकें . कृपया पधारें, सादर ....

कृपया अपनी राय दे ,आपके सुझाव हमारे लिए महत्वपूर्ण हैं |

loading...
[facebook][blogger]

MKRdezign

Contact Form

Name

Email *

Message *

Powered by Blogger.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget