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भगवान श्री कृष्ण की जन्म कुण्डली

ये है भगवान श्री कृष्ण की जन्म कुण्डली ... जिसमें वृष के चंद्र लग्न में, सिंह के सूर्य चौथे मातृ स्थान पर, कन्या के बुध पंचम संतान एवं विद्या स्थान पर, तुला के शुक्र, शनि केतु छठे शत्रु स्थान पर (यह योग ही श्री कृष्ण को जीवन भर शत्रुओं और विरोधियों पर विजय दिलाता रहा और यही योग श्री कृष्ण को शाप लगने और उनकी मृत्यु होने (दरअसल यह योग हत्या होने का योग है , अत: श्री कृष्ण की बहेलिया द्वारा धोखे से ही हत्या हो गई ) का कारण बना

ये है भगवान श्री कृष्ण की जन्म कुण्डली ... जिसमें वृष के चंद्र लग्न में, सिंह के सूर्य चौथे मातृ स्थान पर, कन्या के बुध पंचम संतान एवं विद्या स्थान पर, तुला के शुक्र, शनि केतु छठे शत्रु स्थान पर (यह योग ही श्री कृष्ण को जीवन भर शत्रुओं और विरोधियों पर विजय दिलाता रहा और यही योग श्री कृष्ण को शाप लगने और उनकी मृत्यु होने (दरअसल यह योग हत्या होने का योग है , अत: श्री कृष्ण की बहेलिया द्वारा धोखे से ही हत्या हो गई ) का कारण बना , यहॉं पर शुक्र किसी राजसी स्त्री यानि गांधारी को वजह बनाता है जिसने श्री कृष्ण को शाप दिया , शनि किसी नीच जाति और तंत्र या शाप को वजह बनाता है जिसकी वजह से ब्याध (बहेलिया) श्री कृष्ण की मृत्यु की वजह बनाता है, छठा केतु जहॉं सारे शत्रुओं और विरोधियों का सर्वनाश कर देता है वहीं , यही केतु ही उसी आदमी की हत्या से मृत्यु का कारण बनता है , श्रीमती इंदिरा गांधी की जन्म कुंडली में भी यही छठा केतु विद्यमान था ) , मकर का मंगल उच्च का होकर नवम धर्म तीर्थ भाग्‍य स्थान में विराजमान है, मीन के गुरू एकादश भाव में आय स्थान में विराजमान हैं । 

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भगवान श्री कृष्ण की जन्म कुण्डली बहुत ही अद्भूत है,आप भी अपनी कुंडली बहुत आसानी से बना सकते है वो भी free में|आपको बस हमारी वेबसाइट astrovidhi पर जा कर अपनी details भरनी होगी और आपको आपकी कुंडली मिल जाएगी|

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