अलसी (Flax)है बहुत गुणकारी, फायदे और व्यंजन

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अलसी (Flax)एक ऐसा पौधा है जिसके लगभग सभी हिस्से महत्वपूर्ण है। भारत ,चीन, रूस पोलेण्ड,बेल्जियम आदि देशो मे उगाया जाने वाला समशीतोष्णय पौधा है। रेशेदार फसलों में इसका महत्वपूर्ण स्थान है। इसके पौधे से निकलने वाले रेशे से मोटे कपड़े, डोरी, रस्सी और टाट बनाए जाते हैं। इसके बीज से तेल निकाला जाता है और तेल का प्रयोग वार्निश , रंग,साबुन, रोगन, पेन्ट तैयार करने में किया जाता है। 
                         अलसी में कई सारे महत्वपूर्ण  गुण होते  हैं । अलसी का रोज सेवन करने से आप कई रोगों से छुटकारा पा सकते हैं।   सुपर फूड अलसी में ओमेगा 3 या ॐ 3  व सबसे अधिक फाइबर होता है। अलसी को  WHO ने सुपर फूड माना है। यह रोगों के उपचार में लाभप्रद है। लेकिन इसका सेवन अलग-अलग बीमारी में अलग-अलग तरह से किया जाता है।यह हमें कई रोगों से लड़ने की शक्ति देता है। ओमेगा 3 हमारे शरीर के अंदर नहीं बनता इसे भोजन द्वारा ही ग्रहण किया जा सकता है। शाकाहारियों के लिए अलसी से अच्छा इसका कोई और स्रोत नहीं है। अगर आप स्वयं को निरोग और चुस्तदुरुस्त रखना चाहते हैं, तो रोज कम से कम एक दो चम्मच अलसी को अपने आहार में शामिल करिए। डायबिटीज के नियंत्रण हेतु आयुवर्धक, आरोग्यवर्धक व दैविक भोजन अलसी को “अमृत“ तुल्य माना गया है।
अलसी से लाभ - 
1.अलसी ब्लड शुगर नियंत्रित रखती है व डायबिटीज से शरीर पर होने वाले दुष्प्रभावों को कम करती है। डायबिटीज के रोगी को कम शर्करा व ज्यादा फाइबर खाने की सलाह दी जाती है।
2. अलसी का तेल जोड़ों के दर्द में राहत दिलाता है।नियमित अलसी का सेवन शरीर को ऊर्जा व  स्फूर्ति प्रदान करता है।
3. इसके प्रयोग से हाई ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करता है और यकृत को स्वस्थ रखता है।
4. अलसी मे पाया जाने वाला तेल त्वचा को स्वस्थ रखता है एवं सूखापन दूर कर एग्जिमा आदि से बचाता है।
5. यह रक्त को पतला बनाये रखती है, शरीर में अच्छे कोलेस्ट्रोल को बढ़ाती है और खराब कोलेस्ट्रोल को कम करती है जिससे ह्रदय स्वस्थ रहता है ।
 6.यह भार कम करता है।  वसा कम करता है, खाने की ललक कम करता है।
रक्त में शर्करा तथा कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को कम करता है।
 7.शुक्राणुओं के निर्माण में सहायता करता है।
8.सबसे महत्वपूर्ण कैंसररोधी हार्मोन्स की सक्रियता बढ़ाता है।
9.इसका नियमित सेवनमहिलाओ मे होने वाली  रजोनिवृत्ति संबंधी परेशानियों से आराम प्रदान करता है। मासिक धर्म के दौरान ऐंठन को कम कर गर्भाशय को स्वस्थ रखता है। 
10.अलसी पेट साफ रखने में इसबगोल से भी ज्यादा प्रभावशाली है। कब्ज, बवासीर मे राहत पाहुचाता है । 
अलसी का सेवन-
1. आयुर्वेद के अनुसार हर रोग की जड़ पेट है और पेट साफ रखने में यह इसबगोल से भी ज्यादा प्रभावशाली है। स्वस्थ व्यक्ति को रोज सुबह-शाम एक-एक चम्मच अलसी का पाउडर पानी के साथ ,सब्जी, दाल या सलाद मे  मिलाकर लेना चाहिए । अलसी के पाउडर को ज्यूस, दूध या दही में मिलाकर भी लिया जा सकता है। इसकी मात्रा 30 से 60 ग्राम प्रतिदिन तक ली जा सकती है। 
2. अलसी को सूखी कढ़ाई में डालिये, रोस्ट कीजिये (अलसी रोस्ट करते समय चट चट की आवाज करती है) और मिक्सी से पीस लीजिये. इन्हें थोड़े दरदरे पीसिये, एकदम बारीक मत कीजिये. भोजन के बाद सौंफ की तरह इसे खाया जा सकता है
3..खांसी मे अलसी की चाय पीएं। पानी को उबालकर उसमें अलसी पाउडर मिलाकर चाय तैयार करें। इसका सेवन दिन में दो तीन बार करें। 
4.डायबिटीज के रोगी को मोतियाबिन्द और काला पानी होने की संभावना ज्यादा रहती है। ऑखों में रोजाना एक बूंद अलसी का तेल डालने से हम इन तकलीफों से बच सकते हैं।
5.कैंसर रोगियों को 3 चम्मच अलसी का तेल पनीर में मिलाकर उसमें सूखे मेवे मिलाकर देने चाहिए।
6.अलसी व गैहूं के मिश्रित आटे में ( अलसी और गेहूं बराबर मात्रा ) 50 प्रतिशत कार्ब, 16 प्रतिशत प्रोटीन व 20 प्रतिशत फाइबर होते हैं यानी इसका ग्लायसीमिक इन्डेक्स गैहूं के आटे से काफी कम होता है।
7.डायबीटिज के मरीज को 25 ग्राम अलसी खाना चाहिए।  उन्हें पीसी अलसी को आटे में मिलाकर रोटी बनाकर खाना चाहिए।  
8. स्वस्थ  को रोज सुबह-शाम एक-एक चम्मच अलसी का पाउडर पानी के साथ ,सब्जी, दाल या सलाद में मिलाकर लें।
9.दमा के रोगी को एक चम्मच अलसी के पाउडर को आधा गिलास पानी में 12 घंटे तक भिगो दे और फिस उसे सुबह-शाम छानकर इसका सेवन करे तो काफी लाभ होता है।
10. डायबिटीज के रोगी को मोतियाबिन्द और काला पानी होने की संभावना ज्यादा रहती है। ऑखों में रोजाना एक बूंद अलसी का तेल डालने से हम इन तकलीफों से बच सकते हैं।
11. पैरों की नियमित देखभाल, अलसी के तेल की मालिश व अलसी खाने से पैरों में रक्त का प्रवाह बढ़ता हैं, पैर के घाव व फोड़े आदि ठीक होते हैं। पैर व नाखुन नम, मुलायम व सुन्दर हो जाते हैं।
ये भी जाने -
अलसी में अधिक फाइबर होता है, जिससे प्यास ज्यादा लगती है।इसके सेवन के दौरान खूब पानी पीना चाहिए। 
कुछ लोगों ऐसा कहते  है कि अलसी गर्म होती है इसलिए गर्मी के मौसम में इसका सेवन नहीं करना चाहिए।परंतु ऐसा नहीं है ,अलसी को आप किसी भी मौसम में खा सकते हैं यह गर्म नहीं होती है। कभी कभी किसी किसी को  पतले दस्त होने लगते है  लेकिन इससे घबराने की जरूरत नहीं है। बाद में अपने आप सही हो जाता है।


अलसी के लड्डू -:

सामग्री -
अलसी - आधा किलो (500 ग्राम)
गेहूं का आटा - आधा किलो (500 ग्राम)
देशी घी - आधा लीटर (500 ग्राम) 
गुड़ या चीनी - 800 ग्राम 
काजू - 100 ग्राम
बादाम - 100 ग्राम
मखाने -50 ग्राम 
पिस्ता - 1 टेबल स्पून
किशमिश - 1 टेबल स्पून
गोंद - 100 ग्राम 
इलाइची - 15 छिली और पीसी हुई 
अलसी के लड्डू बनाने की विधि -
सबसे पहले अलसी को सूखा ही कड़ाई मे सूखा भून ले । ये छिटकती है इसके लिए सावधान रहे। किसी जालीदार ढक्कन को सामने रखे । भुनने के बाद इसे मिक्सी मे पीस कर अलग रख ले । अब आटे को आधे घी मे  भुने । हल्का भूरा भून जाने के बाद इसे भी अलग रख ले । 
 बाकी के घी मे गोंद के छोटे टुकड़े कर के भून ले । इसके बाद बाकी के मेवे भी एक एक करके भून ले । अब सभी मेवे  बेलन की सहायता से दबा दबा और बारीक कर लीजिये या इन्हे छोटा छोटा काट लीजिये। 
        गुड़ या चीनी  चीनी की मात्रा का आधा पानी मिलाकर कढ़ाई में डालिये और चाशनी बनने के लिये रखिये. चीनी घुलने तक चमचे से चलाइये और 1 तार की चाशनी तैयार कर लीजिये(चाशनी उंगली मे दबाये तो चाशनी से तार निकलना चाहिये). 
चाशनी में भुना आटा, भुनी अलसी, काटे हुये मेवे, गोंद और इलाइची डाल कर अच्छी तरह मिला दीजिये.  हल्का गरम रहने पर हाथ से  मिश्रण निकाल कर मध्यम आकार के लड्डू बनाकर थाली में रखिये. सारे मिश्रण से लड्डू बनाकर तैयार कर लीजिये । 
                अब आप इन्हे हवा बंद डब्बे मे रख कर एक महीने तक खा सकते है । सूखे मेवे आप अपने पसन्द से कम ज्यादा कर सकते हैं। 

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