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बस का मंथली पास

इतना सुनते ही कंडक्टर ने गुस्से से आस्तीनें चढाई और डोले दिखाते हुए बोला – “तू क्यों टिकट नहीं लेता है बे …. ?”

डीटीसी की एक बस में एक पहलवान टाइप आदमी चढ़ा.

कंडक्टर ने टिकट लेने के लिए कहा तो पहलवान बोला – “हम टिकट नहीं लेते … ”

पहलवान की बॉडी देखकर कंडक्टर की आगे कुछ कहने की हिम्मत नहीं हुई.

फिर ये हुआ कि लगभग रोज़ ही वह पहलवान उसी बस में सफर करने लगा और कंडक्टर के पूछने पर कह देता – “हम टिकट नहीं लेते … ”

अब तो कंडक्टर को अपनी बेइज्जती लगने लगी और एक दिन उसने भी अपनी बॉडी बनाने के लिए जिम जाना शुरू कर दिया.

धीरे – धीरे इसी तरह 6 महीने गुजर गए. अब कंडक्टर का शरीर भी पहलवान जैसा हो गया था.

और उसने फैसला किया कि आज पहलवान का टिकट काटकर ही मानेगा.

जैसे ही पहलवान बस में चढ़ा, कंडक्टर बोला – “टिकट …. ?”

पहलवान रोज़ की तरह बोला – “हम टिकट नहीं लेते …. ”

इतना सुनते ही कंडक्टर ने गुस्से से आस्तीनें चढाई और डोले दिखाते हुए बोला – “तू क्यों टिकट नहीं लेता है बे …. ?”

पहलवान आराम से बोला – “इसलिए क्योंकि हमने मंथली पास बनवा रखा है …. !!!”
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