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बस खड़ा हूं रिमझीम बारिश में

मै कह रहा था खुद से क्या सभी जैसे दिखते है वैसे होते है


'आत्म' हत्या से पहले
मै खड़ा देख रहा था
बहती नदी को ऊपर से
सोच रहा था 
ये गाड़िया 
ये लोग
ये भागती जिन्दगी
ये कटते लोग
ये सिमटते रिश्ते
ये बिगड़ती दुनिया
ये बेगानी सी हवा
ये मरते जज्बात 
ये सिर्फ ख्याल "मैं" का

मै कह रहा था खुद से
क्या सभी जैसे दिखते है 
वैसे होते है

मै महसूस कर रहा था
इस दुनिया से परे की दुनिया को
और भय खा रहा था 
वो दुनिया भी इस दुनिया की तरह 
बेकार निकली तो

बस खड़ा हूं रिमझीम बारिश में
आत्म हत्या से पहले...

#अज्ञात 
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