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साहूकार की आत्मा

एक बार एक लाला जी ( साहूकार) थे , उनका एकमात्र काम सारे गाँव को परेशान करना और कष्ट पहुंचाना था...... बीमार पड़े तो तो गाँव वालों से कहा कि ' हम सोच रहे है कि आप सब को हमने बहुत कष्ट दिए है , अब प्रायश्चित ही कर लें ' .......

एक बार एक लाला जी ( साहूकार) थे , उनका एकमात्र काम सारे गाँव को परेशान करना और कष्ट पहुंचाना था कभी सूद के नाम पर झूठे मुकद्दमें लिखाते तो कभी किसी और बहाने से कोर्ट कचहरी में गाँव भर को परेशान किये रहते थे , 

बीमार पड़े तो तो गाँव वालों से कहा कि ' हम सोच रहे है कि आप सब को हमने बहुत कष्ट दिए है , अब प्रायश्चित ही कर लें ' ........... , 

आप सब हमें सजा दीजियेगा मरने के बाद हमारी छाती में खूंटा गाड़ दीजियेगा और इस तरह शायद मेरी दुष्टात्मा को शांति मिल जाए , 

लाला जी के मरने पर गाँव वालों ने वैसा ही किया , तुरंत पुलिस आयी कईयों को पकड़ कर ले गयी , क्योंकि लाला जी मरने के पहले पुलिस थाने में रिपोर्ट लिखा गए थे कि गाँव के कुछ लोग हमारी छाती में ' खूँटा ठोक ' कर हमें मारने का प्लान बना रहे है ,

और इस तरह मरकर भी लाला जी ने गाँव को नहीं छोड़ा ,

साथियोँ दुष्टात्मायें ऐसी ही होती है ......!! 
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साहूकार नहीं केजरीवाल लिखिए ज़नाब.

ईमानदारी...
की बीमारी
छोड़ के आजा...
दौड़ के आजा
करे काशी तुझ को इनवाईट...
सारी रात बेशर्मी की हाईट!

:) बिलकुल अरुण जी

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