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नारंज व तुरंत की समस्या (ईरानी कहानी )

एक दिन वह महल में ईधर उधर टहल रहा था कि राजा की नज़र पुत्र के लंबे चौड़े डील डौल पर पड़ी, अचानक उसे अपनी मनौती याद आ गयी. उसने स्वयं से कहा कि मनौती की वजह से मेरे यहां संतान पैदा हुई किन्तु मैं मनौती भूल गया. उसने तुरंत अपने नौकरों को आदेश दिया कि महल के बाहर फ़ौरन दो हौज़ बनाये जाएं. जब हौज़ तैयार हो गये तो उनमें से एक में शहद भरा और दूसरे में तेल. उसके बाद आवाज़ देने वालों ने आवाज़ लगायी कि जो भी चाहे इन हौज़ों से खाए और जितना मर्ज़ी हो ले जाए. निर्धन लोग सुबह से शाम तक आते और बर्तन में शहद और तेल ले जाते थे. एक दिन की बात है कि एक बुढ़िया हौज़ के पास आई और जैसे ही उसने प्याला हौज़ में डुबायो, राजकुमार ने उसे देख और बुढ़िया के काठी और उसके डील डौल पर हंसी आ गयी।

पुराने समय की बात है एक राजा था जिसके कोई संतान नहीं थी।

उसने हर दरवाज़ा खटखटाया कि उसे ईश्वर संतान दे किन्तु कोई लाभ नहीं हुआ. उसने एक मनौती मानी कि यदि उसके यहां संतान होती है तो अपने महल के एक हौज़ को शहद से भरेगा और दूसरे को तेल से ताकि निर्धन लोग आएं, खाएं और ले जाएं. ईश्वर ने उसकी सुन ली. ईश्वर ने उसे एक पुत्र प्रदान किया. राजा की ख़ुशियों का ठिकाना नहीं रहा, उसकी समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करे. उसने अपने पुत्र को दाया के हवाले किया ताकि उसे सही ढंग से बड़ा करे. उसने पुत्र के सुख के सारे सामान उपलब्ध कराए. पुत्र नाज़ व नख़रों के बीच बड़ा होता है, यहां तक ​​कि वह 18 वर्ष का हो जाता है।

एक दिन वह महल में ईधर उधर टहल रहा था कि राजा की नज़र पुत्र के लंबे चौड़े डील डौल पर पड़ी, अचानक उसे अपनी मनौती याद आ गयी. उसने स्वयं से कहा कि मनौती की वजह से मेरे यहां संतान पैदा हुई किन्तु मैं मनौती भूल गया. उसने तुरंत अपने नौकरों को आदेश दिया कि महल के बाहर फ़ौरन दो हौज़ बनाये जाएं. जब हौज़ तैयार हो गये तो उनमें से एक में शहद भरा और दूसरे में तेल. उसके बाद आवाज़ देने वालों ने आवाज़ लगायी कि जो भी चाहे इन हौज़ों से खाए और जितना मर्ज़ी हो ले जाए. निर्धन लोग सुबह से शाम तक आते और बर्तन में शहद और तेल ले जाते थे. एक दिन की बात है कि एक बुढ़िया हौज़ के पास आई और जैसे ही उसने प्याला हौज़ में डुबायो, राजकुमार ने उसे देख और बुढ़िया के काठी और उसके डील डौल पर हंसी आ गयी।

उसने ग़ुलैल में एक पत्थर लगाया और बुढ़िया के प्याले को निशाना बनाया, पत्थर पड़ते ही प्याला टूट गया और उसमें मौजूद तेल बह गया. बुढ़िया से राजा के पुत्र को देखने के लिए सिर उठाकर ऊपर देखा. बुढ़िया ने कहा मैं तुझे धिक्कार नहीं करना चाहती क्योंकि तू राजा की एकलौती संतान है, लेकिन जाओ मैं तुम्हें श्राप देती हूं कि नारंज व तुरंत की समस्या में ग्रस्त हो जाओ. राजकुमार बुढ़िया की यह बात सुनकर यह सोचने लगा कि नारंज व तुरंज की लड़कियां कौन हैं? उसने बुढ़िया से पूछा? बुढ़िया ने कहा कि मैं उसके बारे में कुछ नहीं जानती, जाओ उन लोगों से पूछो जो इसके बारे में जानते हों।

राजकुमार बुढ़िया की बात से हैरान अपनी मां के पास आया और अपनी मां से पुराने समय की बात है एक राजा था जिसके कोई संतान नहीं थी.

उसने हर दरवाज़ा खटखटाया कि उसे ईश्वर संतान दे किन्तु कोई लाभ नहीं हुआ. उसने एक मनौती मानी कि यदि उसके यहां संतान होती है तो अपने महल के एक हौज़ को शहद से भरेगा और दूसरे को तेल से ताकि निर्धन लोग आएं, खाएं और ले जाएं. ईश्वर ने उसकी सुन ली. ईश्वर ने उसे एक पुत्र प्रदान किया. राजा की ख़ुशियों का ठिकाना नहीं रहा, उसकी समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करे. उसने अपने पुत्र को दाया के हवाले किया ताकि उसे सही ढंग से बड़ा करे. उसने पुत्र के सुख के सारे सामान उपलब्ध कराए. पुत्र नाज़ व नख़रों के बीच बड़ा होता है, यहां तक ​​कि वह 18 वर्ष का हो जाता है।

एक दिन वह महल में ईधर उधर टहल रहा था कि राजा की नज़र पुत्र के लंबे चौड़े डील डौल पर पड़ी, अचानक उसे अपनी मनौती याद आ गयी. उसने स्वयं से कहा कि मनौती की वजह से मेरे यहां संतान पैदा हुई किन्तु मैं मनौती भूल गया. उसने तुरंत अपने नौकरों को आदेश दिया कि महल के बाहर फ़ौरन दो हौज़ बनाये जाएं. जब हौज़ तैयार हो गये तो उनमें से एक में शहद भरा और दूसरे में तेल. उसके बाद आवाज़ देने वालों ने आवाज़ लगायी कि जो भी चाहे इन हौज़ों से खाए और जितना मर्ज़ी हो ले जाए. निर्धन लोग सुबह से शाम तक आते और बर्तन में शहद और तेल ले जाते थे. एक दिन की बात है कि एक बुढ़िया हौज़ के पास आई और जैसे ही उसने प्याला हौज़ में डुबायो, राजकुमार ने उसे देख और बुढ़िया के काठी और उसके डील डौल पर हंसी आ गयी।

उसने ग़ुलैल में एक पत्थर लगाया और बुढ़िया के प्याले को निशाना बनाया, पत्थर पड़ते ही प्याला टूट गया और उसमें मौजूद तेल बह गया. बुढ़िया से राजा के पुत्र को देखने के लिए सिर उठाकर ऊपर देखा. बुढ़िया ने कहा मैं तुझे धिक्कार नहीं करना चाहती क्योंकि तू राजा की एकलौती संतान है, लेकिन जाओ मैं तुम्हें श्राप देती हूं कि नारंज व तुरंत की समस्या में ग्रस्त हो जाओ. राजकुमार बुढ़िया की यह बात सुनकर यह सोचने लगा कि नारंज व तुरंज की लड़कियां कौन हैं? उसने बुढ़िया से पूछा? बुढ़िया ने कहा कि मैं उसके बारे में कुछ नहीं जानती, जाओ उन लोगों से पूछो जो इसके बारे में जानते हों।

राजकुमार बुढ़िया की बात से हैरान अपनी मां के पास आया और अपनी मां से नारंज व तुरंज की लड़कियों के बारे में पूछा? राजमाता को आश्चर्य हुआ कि उसके बेटे ने यह कहां से सुना. राजकुमार ने अपनी मां से सारी बातें बताईं. राजमाता ने कहा, सुनने में यह आया है कि इस नगर से दूर एक बाग़ है जिसके नारंज व तूरंज बहुत बेहतरीन होते हैं और उन्हीं नारंज व तुरंज से दुनिया की सबसे सुन्दर लड़कियां पैदा होती हैं किन्तु बेटा यह केवल बातें हैं, क्योंकि आज तक जो भी नारंज व तुरंज की लड़कियों की तलाश में गया है, वह वापस नहीं आया है और उसकी मौत की सूचना मिली. राजकुमार को बुढ़िया की बातें काट रही थीं, मां की बातें उसकी समझ में कुछ आ नहीं रही थीं, उसने मां से कहा कि जो भी हो मैं लड़कियों को लेने जाऊंगा. राजमाता को अपने कहे पर पछतावा हो रहा था. उन्होंने अपने बेटो को लाख समझाया और कहा कि इसका कोई लाभ नहीं है, कितने शक्तशाली और वीर लोग गये किन्तु सब मारे गये, किन्तु पुत्र ने स्वीकार नहीं किया. राजकुमार जिस पर नारंज व तुरंज की लड़किया छाई हुई थीं, लड़कियों की तलाश पर जाने की ज़िद करने लगा. राजामाता परेशान मुद्रा में राजा के पास आईं और उससे सारी घटना बताई. राजा ने ऊंची आवाज़ से राजकुमार को पुकारा किन्तु राजकुमार ने राजा की बात एक कान से सुनी और दूसरे कान से निकाल दी.



राजा की समझ में नहीं आ रहा था कि वह इस लड़के का क्या करे. अंततः उसने कहा कि यदि तुम ज़िद पर अड़े हुए हो तो अपने साथ कुछ सेवकों को ले जाओ. किन्तु राजकुमार ने कहा कि वह अकेले ही लड़कियों की तलाश में जाएगा. राजकुमार महल के अस्तबल में गया और उसके मालिक से कहा कि सबसे तेज़ रफ़तार घोड़ा उसे दे. उसने कहा कि घोड़े पर ज़ीन कस दो और उसमें यात्रा में आने वाली वस्तुएं रख दे. जब सारी चीज़ें तैयार हो गयीं तो राजकुमार यात्रा पर निकल पड़ा. चलते चलते उसे रास्ते में घने जंगल में उसे एक अध्यात्मिक महापुरुष मिले. लड़के को आश्चर्य हुआ कि कैसे यह महापुरुष उसके सामने प्रकट हुए. महापुरुष ने राजकुमार से कहा कि, युवराज, कहां का इरादा है? राजकुमार ने कहा नारंज व तुरंज के बाग़ जा रहा हूं ताकि अपने लिए नारंज व तुरंज की लड़कियां ला सकूं. बूढ़े व्यक्ति ने कहा कि बेहतर है यहां से पलट जाओ, इस मार्ग में बहुत समस्याएं हैं, पलट जाओ और अपने नगर में सुखद जीवन व्यतीत करो. राजकुमार ने कहा कि बहुत लोगों ने मुझे समझाने का प्रयास किया किन्तु मैंने भी लड़कियां लाने की ठान ली हैं।

महापुरुष ने कहा, ठीक है जब तुम मेरी बात पर ध्यान नहीं दे रहे हो और तुम्हारा इरादा बदल नहीं रहा है, तो मेरी बात ध्यान से सुनो, जिस रास्ते से आये हो उसी रास्ते पर थोड़ी दूर चलने पर दायें हाथ पर एक जंगल पड़ेगा, जंगल में ख़ूंख़ार जानवर तुम्हें डराएंगे और भांति भांति की आवाज़ें निकालेंगे, तुम उन पर ध्यान न देना और अपने मार्ग को जारी रखना. केवल पीछे मुड़कर न देखना. जंगल से निकलने के बाद रास्ते में तुम्हें एक देव का घर मिलेगा. बूढ़ी राक्षसी घर के सामने बैठी होगी और उससे पूछना कि बाग़े नारंज व तुरंज कहां है? वह सारी चीज़ें तुम्हें अच्छी तरह बता देगी. राजकुमार यह सुनकर प्रसन्न हो उठा और उसने राक्षसी से विदाई ली और आगे बढ़ गया. चलते चलते अभी वह जंगल में नहीं पहुंचा थ कि ख़तरनाक जानवरों ने उस पर हमला कर दिया, वह एक से एक ख़तरनाक दांत व पंजे दिखा रहे थे. राजकुमार आगे बढ़ता रहा और उसने तनिक भी उन पर ध्यान नहीं दिया, इसी तरह वह जानवरों के बीच से होता हुआ जंगल पहुंचता है और जानवरों की आवाज़ें भी समाप्त हो जाती हैं।

वह प्रसन्न था कि उसने यह ख़तरनाक क्षण सरलता से गुज़ार लिया. चलते चलते उसे उस राक्षसी का घर मिला जिसके बारे में महापुरुष ने बताया था. वह घर के निकट पहुंचा और उसने देखा कि बूढ़ी राक्षसी घर के सामने बैठी हुई है. वह राक्षसी के निकट पहुंचा और उसे सलाम किया. राक्षसी ने कहा, हे पुत्र, कोई भी आदम की संतान इस देवलोक में न आ सका, तुम कैसे यहां पहुंचे. परियों के चंगुल से सुरक्षित निकल आये लगता है कि बहुत सौभाग्य शाली हो. तुमने यह सारे ख़तरे जान पर मोल लिए अब बताओ कहां जाना चाहते हो? राजकुमार ने कहाः मुझे नारंज व तुरंज के बाग़ जाना है, राक्षसी ने कहा, यहां तक ​​तो सुरक्षित पहुंच गये हो यदि मेरी बात ध्यान से सुनेगो तो तुम नारंज व तुरंज के बाग़ सरलता से पहुंच जाओग.की लड़कियों के बारे में पूछा? राजमाता को आश्चर्य हुआ कि उसके बेटे ने यह कहां से सुना. राजकुमार ने अपनी मां से सारी बातें बताईं. राजमाता ने कहा, सुनने में यह आया है कि इस नगर से दूर एक बाग़ है जिसके नारंज व तूरंज बहुत बेहतरीन होते हैं और उन्हीं नारंज व तुरंज से दुनिया की सबसे सुन्दर लड़कियां पैदा होती हैं किन्तु बेटा यह केवल बातें हैं, क्योंकि आज तक जो भी नारंज व तुरंज की लड़कियों की तलाश में गया है, वह वापस नहीं आया है और उसकी मौत की सूचना मिली. राजकुमार को बुढ़िया की बातें काट रही थीं, मां की बातें उसकी समझ में कुछ आ नहीं रही थीं, उसने मां से कहा कि जो भी हो मैं लड़कियों को लेने जाऊंगा. राजमाता को अपने कहे पर पछतावा हो रहा था. उन्होंने अपने बेटो को लाख समझाया और कहा कि इसका कोई लाभ नहीं है, कितने शक्तशाली और वीर लोग गये किन्तु सब मारे गये, किन्तु पुत्र ने स्वीकार नहीं किया. राजकुमार जिस पर नारंज व तुरंज की लड़किया छाई हुई थीं, लड़कियों की तलाश पर जाने की ज़िद करने लगा. राजामाता परेशान मुद्रा में राजा के पास आईं और उससे सारी घटना बताई. राजा ने ऊंची आवाज़ से राजकुमार को पुकारा किन्तु राजकुमार ने राजा की बात एक कान से सुनी और दूसरे कान से निकाल दी।

राजा की समझ में नहीं आ रहा था कि वह इस लड़के का क्या करे. अंततः उसने कहा कि यदि तुम ज़िद पर अड़े हुए हो तो अपने साथ कुछ सेवकों को ले जाओ. किन्तु राजकुमार ने कहा कि वह अकेले ही लड़कियों की तलाश में जाएगा. राजकुमार महल के अस्तबल में गया और उसके मालिक से कहा कि सबसे तेज़ रफ़तार घोड़ा उसे दे. उसने कहा कि घोड़े पर ज़ीन कस दो और उसमें यात्रा में आने वाली वस्तुएं रख दे. जब सारी चीज़ें तैयार हो गयीं तो राजकुमार यात्रा पर निकल पड़ा. चलते चलते उसे रास्ते में घने जंगल में उसे एक अध्यात्मिक महापुरुष मिले. लड़के को आश्चर्य हुआ कि कैसे यह महापुरुष उसके सामने प्रकट हुए. महापुरुष ने राजकुमार से कहा कि, युवराज, कहां का इरादा है? राजकुमार ने कहा नारंज व तुरंज के बाग़ जा रहा हूं ताकि अपने लिए नारंज व तुरंज की लड़कियां ला सकूं. बूढ़े व्यक्ति ने कहा कि बेहतर है यहां से पलट जाओ, इस मार्ग में बहुत समस्याएं हैं, पलट जाओ और अपने नगर में सुखद जीवन व्यतीत करो. राजकुमार ने कहा कि बहुत लोगों ने मुझे समझाने का प्रयास किया किन्तु मैंने भी लड़कियां लाने की ठान ली हैं।

महापुरुष ने कहा, ठीक है जब तुम मेरी बात पर ध्यान नहीं दे रहे हो और तुम्हारा इरादा बदल नहीं रहा है, तो मेरी बात ध्यान से सुनो, जिस रास्ते से आये हो उसी रास्ते पर थोड़ी दूर चलने पर दायें हाथ पर एक जंगल पड़ेगा, जंगल में ख़ूंख़ार जानवर तुम्हें डराएंगे और भांति भांति की आवाज़ें निकालेंगे, तुम उन पर ध्यान न देना और अपने मार्ग को जारी रखना. केवल पीछे मुड़कर न देखना. जंगल से निकलने के बाद रास्ते में तुम्हें एक देव का घर मिलेगा. बूढ़ी राक्षसी घर के सामने बैठी होगी और उससे पूछना कि बाग़े नारंज व तुरंज कहां है? वह सारी चीज़ें तुम्हें अच्छी तरह बता देगी. राजकुमार यह सुनकर प्रसन्न हो उठा और उसने राक्षसी से विदाई ली और आगे बढ़ गया. चलते चलते अभी वह जंगल में नहीं पहुंचा थ कि ख़तरनाक जानवरों ने उस पर हमला कर दिया, वह एक से एक ख़तरनाक दांत व पंजे दिखा रहे थे. राजकुमार आगे बढ़ता रहा और उसने तनिक भी उन पर ध्यान नहीं दिया, इसी तरह वह जानवरों के बीच से होता हुआ जंगल पहुंचता है और जानवरों की आवाज़ें भी समाप्त हो जाती हैं।

वह प्रसन्न था कि उसने यह ख़तरनाक क्षण सरलता से गुज़ार लिया. चलते चलते उसे उस राक्षसी का घर मिला जिसके बारे में महापुरुष ने बताया था. वह घर के निकट पहुंचा और उसने देखा कि बूढ़ी राक्षसी घर के सामने बैठी हुई है. वह राक्षसी के निकट पहुंचा और उसे सलाम किया. राक्षसी ने कहा, हे पुत्र, कोई भी आदम की संतान इस देवलोक में न आ सका, तुम कैसे यहां पहुंचे. परियों के चंगुल से सुरक्षित निकल आये लगता है कि बहुत सौभाग्य शाली हो. तुमने यह सारे ख़तरे जान पर मोल लिए अब बताओ कहां जाना चाहते हो? राजकुमार ने कहाः मुझे नारंज व तुरंज के बाग़ जाना है, राक्षसी ने कहा, यहां तक ​​तो सुरक्षित पहुंच गये हो यदि मेरी बात ध्यान से सुनेगो तो तुम नारंज व तुरंज के बाग़ सरलता से पहुंच जाओग.
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