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हम होटल में खाते वक्त नहीं सोचते,कैसे चुकाते है ज्यादा पैसे

जहां सर्विस टैक्स के नाम पर आपके द्वारा दिया गया पैसा सरकार के पास जाता है। वहीं, सर्विस चार्ज में सारा पैसा सर्विस देने वाले व्यक्ति के पास चला जाता है। कब और कितना देना होता है सर्विस टैक्स और सर्विस चार्ज : - सर्विस टैक्स एक्ट के सेक्शन 65 (105) में साफ लिखा है कि वही रेस्टोरेंट 10.03 फीसदी सर्विस टैक्स ले सकते हैं जिनके एयर कंडीशनिंग और लिकर लाइसेंस दोनों की व्यवस्था न हो। जिनके पास यह दोनों सुविधा हो वो केवल 4.94 फीसदी ही सर्विस टैक्स ले सकते हैं। - सर्विस चार्ज के मामले में कोई दर तय नहीं है।....... - वित्त मंत्रालय के मुताबिक सर्विस टैक्स टोटल एमाउंट पर न लगाकर केवल इनवाइस एमांउट के 40 फीसदी पर लगता है। इनवाइस एमाउंट में वैट शामिल नहीं होता है। उदाहरण के तौर पर अगर आपने किसी होटल में 1000 रुपए का खाना खाया तो पूरे हजार रुपए पर सर्विस टैक्स नहीं लगेगा। बल्कि 1000 रुपए के 40 फीसदी यानी केवल 400 रुपए पर ही आपको सर्विस टैक्स चुकाना होगा। बाकी एमाउंट पर सर्विस टैक्स लेना गैरकानूनी है।


हर दिन हमारे देश में लाखों लोग सर्विस टैक्स के नाम पर ज्यादा पैसा चुका कर घर वापस आ जाते हैं। और उनको पता भी नहीं होता है कि ज्यादा पैसे के नाम पर चूना लगा दिया गया है। अब सवाल यह उठता है कि आखिर ये ज्यादा पैसे और चूने का माजरा क्या है? तो जनाब इसका जवाब है सर्विस टैक्स और सर्विस चार्ज की थ्योरी में।चाहती हूँ इस बारे मे अधिक से अधिक लोग जाने ।

क्या है सर्विस टैक्स:

वह कर, जो आप सेवाओं पर देते हैं। जम्मू−कश्मीर के अलावा बाकी सभी राज्यों में सर्विस प्रोवाइडर को सर्विस टैक्स देना होता है। पहले यह 12 फीसदी था, लेकिन आर्थिक मंदी के चलते अब इसे घटाकर 10 फीसदी कर दिया गया है। सर्विस टैक्स फोन, रेस्तरां में खाना, ब्यूटी पार्लर या जिम जाने जैसी सेवाओं पर वसूला जाता है।
क्या है सर्विस चार्ज:

टैक्स एक्सपर्ट सुजीत घोष के मुताबिक सर्विस चार्ज कस्टमर द्वारा दी जाने वाली फोर्सड टिप है। अलग-अलग सर्विस के लिए इसकी दर अलग-अलग है। डॉक्टर को दी जाने वाली फीस, घर बनवाने के लिए मिस्त्री को चुकाया गया पैसा, बैंक द्वारा कुछ सर्विस पर ली जाने वाली फीस, रेलवे रिजर्वेशन पर ली जाने वाली फीस और वकील को केस लड़ने के लिए दी जाने वाली फीस
जैसी कई प्रोफेशनल फीस सर्विस चार्ज के अंदर आती हैं। सर्विस चार्ज को अलग-अलग सेक्टर में अलग-अलग नाम से जाना जाता है। जैसे होटल में बुकिंग फीस, ट्रैवल में सिक्योरिटी फीस, बैंकों में मेनटेनेंश फीस और कस्टमर सर्विस फीस।
दोनों में क्या है अंतर:

-सर्विस टैक्स की दर सीधे सरकार द्वारा तय की जाती है और यह सभी जगह एक सी होती है। वहीं, सर्विस चार्ज की दर सरकार द्वारा न तय होकर सर्विस देने वाले व्यक्ति द्वारा तय की जाती है।
- सर्विस चार्ज और सर्विस टैक्स दोनों के मामले में कस्टमर को अपनी जेब ढीली करनी पड़ती है। लेकिन इन दोनों मदों में जेब ढीली होने में भी अंतर है।
- जहां सर्विस टैक्स के नाम पर आपके द्वारा दिया गया पैसा सरकार के पास जाता है। वहीं, सर्विस चार्ज में सारा पैसा सर्विस देने वाले व्यक्ति के पास चला जाता है।
कब और कितना देना होता है सर्विस टैक्स और सर्विस चार्ज :
- सर्विस टैक्स एक्ट के सेक्शन 65 (105) में साफ लिखा है कि वही रेस्टोरेंट 10.03 फीसदी सर्विस
टैक्स ले सकते हैं जिनके एयर कंडीशनिंग और लिकर लाइसेंस दोनों की व्यवस्था न हो। जिनके पास यह दोनों सुविधा हो वो केवल 4.94 फीसदी ही सर्विस टैक्स ले सकते हैं।
- सर्विस चार्ज के मामले में कोई दर तय नहीं है। अलग-अलग सर्विस प्रोवाइडर अपने हिसाब से अलग-अलग रेट पर सर्विस चार्ज वसूलते हैं।

किस अमाउंट पर देना होता है सर्विस टैक्स-

- वित्त मंत्रालय के मुताबिक सर्विस टैक्स टोटल एमाउंट पर न लगाकर केवल इनवाइस एमांउट के 40 फीसदी पर लगता है। इनवाइस एमाउंट में वैट शामिल नहीं होता है। उदाहरण के तौर पर अगर आपने किसी होटल में 1000 रुपए का खाना खाया तो पूरे हजार रुपए पर सर्विस टैक्स नहीं लगेगा। बल्कि 1000 रुपए के 40 फीसदी यानी केवल 400 रुपए पर ही आपको सर्विस टैक्स चुकाना होगा। बाकी एमाउंट पर सर्विस टैक्स लेना गैरकानूनी है।

- सर्विस टैक्स की तरह सरकार ने सर्विस चार्ज के लिए कोई एमाउंट पर्सेंट तय नहीं किया है। सर्विस देने वाले अपने हिसाब से 5 से लेकर 50 फीसदी तक सर्विस चार्ज कस्टमर से लेते हैं। कई बड़े-बड़े सर्विस प्रोवाइडर 100 फीसदी तक सर्विस चार्ज भी लेते हैं। कुल मिलाकर सर्विस टैक्स को सरकार ने कानूनी मान्यता दी हुई है। इस टैक्स के अंतर्गत आने वाली किसी भी सर्विस को इस्तेमाल करने पर सर्विस टैक्स चुकाने से आप मना नहीं कर सकते हैं। सर्विस टैक्स न चुकाना गैरकानूनी है। लेकिन सर्विस चार्ज न चुकाने का आपके पास पूरा अधिकार है। इसे चुकाना कानूनी बाध्यता नहीं है। तो अगली बार मौज से जाएं, घूमे-फिरे, ऐश करें.. लेकिन सर्विस टैक्स के नाम पर बिना ज्यादा पैसे दिए।

#दैनिक भास्कर के सौजन्य से


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