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गूंजती आवाजों का रहस्य (भूत की कहानी )

जब मैंने इसे बार बार सुना तो मैंने बिना डरे उस अंधेरी गैलरी में जाने का सोचा और यह देखकर हक्का बक्का रह गया कि वहाँ कोई भी नहीं था। अब मुझे थोड़ा डर लगने लगा। मैं जल्दी जल्दी वहाँ से भागा और अपने कमरे से होते हुए कृष्णा के कमरे में गया तो देखा कि वह तो सो रहा था। मैंने उसी समय उसे जगा कर गैलरी वाली घटना बताई। कृष्णा ने कहा- मैं तो काफ़ी देर से सो रहा था, मैं नीचे तो गया ही नहीं। मैं यह सुन कर घबरा गया कि यह सब कैसे हुआ?



मेरा नाम रामा मूर्ति है, मैं दक्षिण भारत के कुन्नूर जिले का रहने वाला हूँ और अपने अंकल से मिलने कोट्टायम आया था।

वैसे मैं भूत-प्रेत में विश्वास नहीं करता लेकिन उस दिन जो मेरे साथ हुआ था, उसे देखकर मैं इस किस्से को आपके सामने रखना चाहता हूँ।



उस रात वहाँ पर हम परिवार के पाँच सदस्य मैं, मेरी दादी-अम्मा, चाचा-चाची और मेरा चचेरा भाई थे और मैं सोफे पर लेट कर दादी से बात कर रहा था और चाचा, चाची और मेरा चचेरा भाई ऊपरी माले पर बने कमरे में सो रहे थे।

रात के गयारह बजे होंगे कि तभी मैंने अचानक देखा कि किसी ने गैलरी की रोशनी बन्द कर दी। जिस कमरे में हम बैठे थे वो गैलरी से थोड़ी दूरी पर था और मुझे वहाँ से गैलरी में कुछ नहीं दिख रहा था।

यह सुनिश्चित करने के लिए मैंने अपने चचेरे भाई ‘कृष्णा’ को आवाज़ दी और दूसरी तरफ मुझे ‘हाँ’ की आवाज़ सुनाई दी।

मैं चौंक गया कि वो वहाँ कैसे पहुँच गया क्योंकि उस गैलरी तक सिर्फ हमारे कमरे से ही जाने का रास्ता है।

मैंने फिर से तेज आवाज में उसका नाम पुकारा और इस बार भी वही आवाज़ दुगनी तेज सुनाई दी।

जब मैंने इसे बार बार सुना तो मैंने बिना डरे उस अंधेरी गैलरी में जाने का सोचा और यह देखकर हक्का बक्का रह गया कि वहाँ कोई भी नहीं था।

अब मुझे थोड़ा डर लगने लगा।

मैं जल्दी जल्दी वहाँ से भागा और अपने कमरे से होते हुए कृष्णा के कमरे में गया तो देखा कि वह तो सो रहा था।



मैंने उसी समय उसे जगा कर गैलरी वाली घटना बताई।

कृष्णा ने कहा- मैं तो काफ़ी देर से सो रहा था, मैं नीचे तो गया ही नहीं।

मैं यह सुन कर घबरा गया कि यह सब कैसे हुआ?

क्योंकि कोई चोर भी हमारे कमरे में से गुजरे बिना उस गैलरी तक नहीं पहुँच सकता।

मैंने सोचा कि यह सब मेरे साथ ही हुआ लेकिन अगले दिन अन्कल ने मुझे बताया कि उन्हें भी कभी कभी ऐसे ही आवाज़ें सुनाई देती हैं लेकिन वो ध्यान नहीं देते।

कुछ महीनों के बाद उन्होंने भी वो घर बेचकर दूसरा नया घर ले लिया।

लेकिन वह गूंजती आवाजों का रहस्य आज भी मेरे लिए भूलना मुश्किल है।

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Kai jagah aisi darawani aawaze sunai deti hai.
Chalati train ke bahar bhut ki awaz sunai di
https://youtu.be/fXuO1IJs5fs

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