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दृष्टि भेद (Eye Movements: Drusti Bheda) भरतनाट्यम ,वीडियो के साथ

संस्कृत शब्द दृष्टि का अर्थ 'देखने ' दृष्टि से है यह हमारी आंखोंके संबंध में है जिसका प्रयोग देखने से होता है ।आँख का मटकाना या आंदोलित करना होता है जिसमे आंखो के अंदर के काले गोले को तरह तरह से मटका कर डांस मे भाव की अभिव्यक्ति करते है। वैसे इन का प्रयोग हम सभी अपनी दिनचर्या मे करते रहते है। शास्त्रों के अनुसार नेत्र आंदोलनों के आठ प्रकार के होते हैं: 1. समा: नेत्र किसी भी आंदोलन के बिना साधारण तरीके से रखते है। 2. आलोकिता: इसमे आंखो को चारों और गोल धूमते है।

संस्कृत शब्द दृष्टि का अर्थ 'देखने ' दृष्टि से है यह हमारी आंखोंके संबंध में है जिसका प्रयोग देखने से होता है ।आँख का मटकाना या आंदोलित करना होता है जिसमे आंखो के अंदर के काले गोले को तरह तरह से मटका कर डांस मे भाव की अभिव्यक्ति करते है। वैसे इन का प्रयोग हम सभी अपनी दिनचर्या मे करते रहते है। शास्त्रों के अनुसार नेत्र आंदोलनों के आठ प्रकार के होते हैं:

1. समा: नेत्र किसी भी आंदोलन के बिना साधारण तरीके से रखते है।

2. आलोकिता: इसमे आंखो को चारों और गोल धूमते है।

3. साची: आँखों के कोने के माध्यम से या तिरछा देखते हैं।

4. प्रलोकिता : इस तरफ से उस तरफ तक तिरछा देखते है।

5. निमीलित: इसमे आंखो को आधा बंद करते है । ये एक प्रकार से ध्यानावस्था या प्रेम भाव दिखने के लिए नृत्य मे प्रयोग करते है।

6. उललोकिता: ऊपर की ओर देखते हैं।

7. अनुवृत्ता: ऊपर और नीचे आंखों की तीव्र आंदोलनकरना ।

8. अवलोकिता: नीचे देखते है ।

श्लोक:

समम  अलोकितम  साची  प्रलोकिता  निमिलिटी
उललोकिता-अनुवृत्ति  चा तथा चैव -अवलोकितम
इत्याष्ठो  दृष्टि  भेदः  स्यु  कीर्तितः  देख।


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